Source-The Indian Express
19 मई 2025 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई दो घंटे की फोन वार्ता के बाद रूस ने यूक्रेन के साथ संभावित शांति समझौते के लिए सहयोग करने की इच्छा जताई है।
पुतिन ने इस वार्ता को “रचनात्मक” बताया और कहा कि रूस एक संयुक्त ज्ञापन पर काम करने के लिए तैयार है, जिसमें संभावित युद्धविराम और शांति प्रक्रिया के लिए रूपरेखा तय की जाएगी। हालांकि, उन्होंने तत्काल पूर्ण युद्धविराम की प्रतिबद्धता से इनकार किया और कहा कि संघर्ष के “मूल कारणों” को संबोधित करना आवश्यक है।
ट्रंप ने वार्ता के बाद सोशल मीडिया पर कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच वार्ता “तत्काल” शुरू होगी। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों नेताओं ने ऊर्जा और बुनियादी ढांचे पर हमलों को रोकने के लिए 30-दिन की अस्थायी युद्धविराम पर सहमति व्यक्त की है।
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने इस प्रस्तावित युद्धविराम का समर्थन किया है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी शांति वार्ता में यूक्रेन की सीधी भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा, “बिना यूक्रेन की भागीदारी के कोई भी समझौता व्यर्थ होगा।”
इस बीच, यूरोपीय संघ के नेताओं ने ट्रंप और पुतिन के बीच हुई वार्ता पर चिंता व्यक्त की है। ईयू की विदेश नीति प्रमुख काजा कालास ने कहा, “हमारे बिना कोई भी समझौता विफल होगा, क्योंकि समझौते को लागू करने के लिए यूरोप और यूक्रेन की आवश्यकता है।”
हालांकि, पुतिन ने व्यापक युद्धविराम की प्रतिबद्धता से इनकार किया है और पश्चिमी देशों से यूक्रेन को सैन्य सहायता रोकने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन की सैन्य क्षमताओं को कम करना आवश्यक है, जो कि रूस की दीर्घकालिक प्रभाव बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
इस वार्ता के बाद, रूस और यूक्रेन के बीच 175-175 युद्धबंदियों की अदला-बदली पर सहमति बनी है, जो बुधवार को होने की संभावना है। यह कदम शांति प्रक्रिया की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन की यह पहल वास्तविक शांति के बजाय युद्ध को लम्बा खींचने और अधिक रियायतें प्राप्त करने की रणनीति हो सकती है। इसलिए, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सतर्क रहकर इस प्रक्रिया की निगरानी करनी होगी।
