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मुंबई: बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक बड़े कदम के तहत म्यूचुअल फंड (MF) योजनाओं को प्री-इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (Pre-IPO) प्लेसमेंट में निवेश करने से रोक दिया है। सेबी ने स्पष्ट किया है कि म्यूचुअल फंड अब इक्विटी शेयरों के आईपीओ या इक्विटी-संबंधित इंस्ट्रूमेंट्स में केवल एंकर निवेशक हिस्से या पब्लिक इश्यू के माध्यम से ही भाग ले सकते हैं।
🛑 क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
सेबी ने एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) को एक पत्र भेजकर इस नए नियम को लागू किया है। नियामक का मानना है कि यदि म्यूचुअल फंड योजनाओं को प्री-आईपीओ प्लेसमेंट में निवेश करने की अनुमति दी जाती है, तो आईपीओ रद्द होने या स्थगित होने की स्थिति में वे गैर-सूचीबद्ध (Unlisted) शेयर अपने पास रख सकते हैं।
निवेशकों के धन का जोखिम: सेबी को इस बात की चिंता है कि अगर कंपनी आईपीओ के साथ आगे नहीं बढ़ पाती है तो खुदरा निवेशकों का पैसा ऐसे गैर-सूचीबद्ध शेयरों में फंस सकता है।
मौजूदा नियमों का उल्लंघन: सेबी (म्यूचुअल फंड्स) विनियम, 1996 के खंड 11 में अनिवार्य है कि म्यूचुअल फंड केवल सूचीबद्ध (Listed) या सूचीबद्ध होने वाले प्रतिभूतियों में ही निवेश करें। प्री-आईपीओ प्लेसमेंट में निवेश से इस खंड का उल्लंघन होने का जोखिम था।
एंकर बुक का विकल्प: सेबी का यह भी मानना है कि जब एंकर बुक जैसा विकल्प पहले से ही संस्थागत निवेशकों के लिए मौजूद है, तो गैर-सूचीबद्ध स्पेस में पैसा लगाने का कोई कारण नहीं है।
📊 उद्योग जगत पर असर
यह कदम म्यूचुअल फंड उद्योग के लिए एक झटका माना जा रहा है, क्योंकि फंड मैनेजर अक्सर अपने निवेशकों के लिए बेहतर रिटर्न (Alpha) उत्पन्न करने के लिए प्री-आईपीओ मार्ग का उपयोग करते थे।
अब, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs), घरेलू फैमिली ऑफिस, और वैकल्पिक निवेश फंड (AIFs) को इस निवेश मार्ग में म्यूचुअल फंडों पर बढ़त मिल सकती है।
म्यूचुअल फंडों को अब अपनी निवेश रणनीतियों को समायोजित करना होगा और सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध प्रतिभूतियों पर अधिक ध्यान केंद्रित करना होगा।
यह निर्णय निवेशक सुरक्षा को मजबूत करने और म्यूचुअल फंडों के निवेश में तरलता (Liquidity) और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के सेबी के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है।
आप यहां एक वीडियो देख सकते हैं जिसमें म्यूचुअल फंड निवेशकों को राहत देने के लिए सेबी द्वारा एग्जिट लोड कम करने जैसे फैसलों पर चर्चा की गई है: Mutual Fund Investors को बड़ी राहत, SEBI ने Exit Load 5% से घटाकर 3% किया. यह वीडियो सेबी के म्यूचुअल फंड से जुड़े फैसलों की एक व्यापक झलक देता है।
