Source HT
ढाका: बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को सोमवार को एक विशेष ट्रिब्यूनल ने मानवता के खिलाफ अपराध के लिए मौत की सज़ा सुनाई है। यह फैसला पिछले साल छात्र विद्रोह को कुचलने के लिए घातक हथियारों के इस्तेमाल का आदेश देने से जुड़े मामले में आया है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार लगभग 1,400 लोग मारे गए थे।
⚖️ कोर्ट का फैसला और आरोप
अंतर्राष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल (ICT) ने शेख हसीना को जुलाई-अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हत्याओं का मास्टरमाइंड करार दिया। अदालत ने उन्हें हत्या का आदेश देने और हिंसा को रोकने में विफल रहने सहित कई आरोपों में दोषी पाया। हसीना, जो इस समय भारत में निर्वासित हैं, पर आरोप है कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ड्रोन और हेलीकॉप्टरों का उपयोग करने का निर्देश दिया था। पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी मृत्युदंड दिया गया है।
हसीना ने फैसले को ‘राजनीति से प्रेरित दिखावा’ और ‘धांधली वाले ट्रिब्यूनल’ का आदेश बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें खुद का बचाव करने का निष्पक्ष मौका नहीं मिला।
📢 संयुक्त राष्ट्र और नोबेल पुरस्कार विजेता की प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र (UN) की प्रतिक्रिया: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने इस सज़ा को ‘पीड़ितों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण’ बताया, लेकिन साथ ही मृत्युदंड देने पर खेद व्यक्त किया। यूएन के प्रवक्ता ने कहा, “हम मौत की सज़ा थोपे जाने पर खेद व्यक्त करते हैं, जिसका हम सभी परिस्थितियों में विरोध करते हैं।”
मोहम्मद यूनुस ने किया स्वागत: अंतरिम सरकार के प्रमुख और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने बयान जारी कर कहा कि “कानून से ऊपर कोई नहीं है।” उनकी सरकार ने कहा है कि वह भारत से पूर्व प्रधानमंत्री के प्रत्यर्पण के लिए कानूनी रास्ता अपनाएगी।
🇮🇳 भारत की स्थिति
भारत सरकार ने इस संवेदनशील फैसले पर गहनता से गौर करने की बात कही है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि एक करीबी पड़ोसी के रूप में, भारत बांग्लादेश के लोगों के सर्वोत्तम हितों के लिए प्रतिबद्ध है और वह क्षेत्र में शांति, लोकतंत्र और स्थिरता को ध्यान में रखते हुए सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक रूप से बातचीत करेगा।
⚡️ देश में तनाव
फैसले के बाद बांग्लादेश में तनाव की स्थिति बनी हुई है। राजधानी ढाका में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने इस फैसले को अलोकतांत्रिक शासन का ‘स्क्रिप्टेड’ कदम बताया है और चेतावनी दी है कि यदि उनकी पार्टी, अवामी लीग पर से प्रतिबंध नहीं हटाए गए तो देश में अराजकता फैलेगी।
