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नई दिल्ली, 11 मई 2025 — लगभग आधी सदी तक अंतरिक्ष में रहने के बाद, सोवियत संघ की पुरानी उपग्रह “कोसमॉस-482” आखिरकार पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश कर हिंद महासागर में गिर गई। यह उपग्रह 1972 में लॉन्च किया गया था और इसे मूल रूप से शुक्र ग्रह (Venus) के लिए भेजा जाना था, लेकिन तकनीकी विफलताओं के कारण यह पृथ्वी की कक्षा में ही फंस गई थी।
जानकारों के अनुसार, कोसमॉस-482 रविवार की सुबह पृथ्वी के वायुमंडल में फिर से प्रवेश कर गया और इसका मलबा हिंद महासागर में गिरा। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका अधिकतर हिस्सा वायुमंडलीय घर्षण से जल गया, लेकिन कुछ टुकड़े पानी में जा गिरे।
यह उपग्रह उस दौर का प्रतीक है जब अमेरिका और सोवियत संघ के बीच अंतरिक्ष होड़ चरम पर थी। कोसमॉस-482 का मिशन “वेनरा” श्रृंखला का हिस्सा था, जो शुक्र ग्रह की सतह की जानकारी एकत्र करने के लिए डिज़ाइन किया गया था। परंतु इसकी लॉन्चिंग के बाद नियंत्रण में आई समस्या ने इसे कभी अपने गंतव्य तक नहीं पहुंचने दिया।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों ने पुष्टि की है कि गिरने से किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है।
वैज्ञानिकों की राय: विज्ञान जगत इस घटना को एक ऐतिहासिक मोड़ के रूप में देख रहा है, क्योंकि यह याद दिलाता है कि अंतरिक्ष में भेजे गए वस्त्र लंबे समय तक वहां रह सकते हैं और उनका ट्रैक रखना कितना जरूरी है।
