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दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए रोके गए विधेयकों पर निर्णय लेने की समयसीमा तय करने को लेकर एक महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा है। यह मामला संविधान के अनुच्छेद 143 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा अदालत से सलाह मांगने की प्रक्रिया के तहत आया है।
राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट से 14 अहम सवालों पर राय मांगी है, जिनमें मुख्य प्रश्न यह है कि क्या न्यायालय राष्ट्रपति को समयसीमा निर्धारित करने का अधिकार दे सकता है ताकि राज्यपाल द्वारा रोके गए विधेयकों पर अनिश्चितकालीन विलंब न हो।
यह कदम तब उठाया गया है जब देश के विभिन्न राज्यों में यह चिंता बढ़ती जा रही है कि राज्यपाल द्वारा विधेयकों को मंजूरी के लिए केंद्र सरकार या राष्ट्रपति के पास भेजने के बाद भी उस पर कोई ठोस निर्णय लंबे समय तक नहीं होता, जिससे राज्य सरकारों की विधायी प्रक्रिया बाधित होती है।
इस संवैधानिक जटिलता को सुलझाने के लिए अब सुप्रीम कोर्ट को तय करना होगा कि क्या अदालत ऐसे मामलों में कोई ठोस मार्गदर्शक समयसीमा तय कर सकती है या नहीं।
यह मामला देश के संघीय ढांचे और विधायी प्रक्रिया के संतुलन से जुड़ा हुआ है, और इसका फैसला भविष्य में राज्यों और केंद्र के बीच संबंधों की दिशा तय कर सकता है।
