Source The Hindu
पडरौना, उत्तर प्रदेश – अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के अधिकारियों ने एक बार फिर भारत के खिलाफ तीखे बयान दिए हैं, जिसमें यूक्रेन संघर्ष को ‘मोदी का युद्ध’ बताया गया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की भूमिका और उसके वैश्विक संबंधों को लेकर लगातार चर्चा हो रही है।
हाल के दिनों में, ट्रंप के कई पूर्व सहयोगियों ने भारत की विदेश नीति, खासकर यूक्रेन-रूस युद्ध पर उसके रुख को लेकर आलोचना की है। उनका तर्क है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने रूस के साथ अपने संबंधों को प्राथमिकता दी है, जिससे पश्चिमी देशों के साथ उसके संबंध प्रभावित हुए हैं।
इन अधिकारियों का मानना है कि यूक्रेन में जारी संघर्ष के लिए भारत की तटस्थता और रूस से तेल आयात जारी रखने की नीति एक प्रकार से रूसी आक्रामकता को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत अपनी आर्थिक वृद्धि और भू-राजनीतिक हितों को साधने के लिए इस संघर्ष का फायदा उठा रहा है।
भारत सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। भारतीय अधिकारियों ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि भारत हमेशा शांति और कूटनीति का पक्षधर रहा है। भारत ने युद्धग्रस्त यूक्रेन को मानवीय सहायता भी प्रदान की है और सभी पक्षों से बातचीत के माध्यम से समाधान खोजने का आग्रह किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ये बयान अमेरिका में आगामी चुनावों और वहां की आंतरिक राजनीति से भी जुड़े हो सकते हैं। ट्रंप और उनके समर्थक अक्सर उन देशों की आलोचना करते रहे हैं जो उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का समर्थन नहीं करते।
यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत सरकार इन बयानों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या इससे दोनों देशों के संबंधों पर कोई गहरा असर पड़ता है।
