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वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका ने 250 से अधिक खाद्य उत्पादों पर आयात शुल्क में कटौती (Tariff Cuts) की घोषणा कर दी है, जिससे भारत के मसालों, चाय और काजू के निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है। अमेरिका में बढ़ती घरेलू महंगाई और किराने के सामान की कीमतों को नियंत्रित करने के दबाव में राष्ट्रपति ने यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
यह फैसला उन भारतीय निर्यातकों के लिए खास तौर पर मायने रखता है जो अगस्त 2025 में लगाए गए 50% टैरिफ से प्रभावित थे। हालांकि, भारत के कुछ सबसे बड़े कृषि-संबंधित निर्यात, जैसे झींगा मछली (Seafood) और बासमती चावल, अभी भी इस छूट सूची से बाहर हैं।
🌶️ किन भारतीय उत्पादों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ?
अमेरिकी टैरिफ कटौती का सबसे ज्यादा फायदा उन कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों को मिलेगा जिनमें भारत की मजबूत बाजार उपस्थिति है:
मसाले: काली मिर्च, लौंग, जीरा, इलायची, हल्दी, और अदरक। 2024 में भारत ने अमेरिका को 50 करोड़ डॉलर से अधिक के मसालों का निर्यात किया था।
पेय पदार्थ: विशेष प्रकार की चाय (Specialty Teas), कॉफी और चाय के अर्क।
मेवे: काजू, नारियल और अन्य सूखे मेवे। अमेरिका में आयात होने वाले काजू का लगभग 20% हिस्सा भारत से आता है।
प्रसंस्कृत खाद्य: आम-आधारित उत्पाद, फलों का गूदा, और कोको तैयारी (Cocoa preparations) जैसे करीब 50 प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस कटौती से भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले समान अवसर मिलेगा और उनके उत्पाद अमेरिकी बाजार में तुरंत सस्ते हो जाएंगे, जिससे निर्यात की मात्रा और मूल्य दोनों में वृद्धि की उम्मीद है। यह छूट लगभग $1 बिलियन के भारतीय निर्यात को सीधे प्रभावित कर सकती है।
📉 टैरिफ कटौती का कारण
यह नीतिगत बदलाव मुख्य रूप से अमेरिका में उपभोक्ता कीमतों में वृद्धि पर काबू पाने के लिए किया गया है। राष्ट्रपति पर घरेलू राजनीतिक दबाव बढ़ रहा था कि वे मुद्रास्फीति (Inflation) को कम करने के लिए कदम उठाएं। आयात शुल्क कम होने से अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए खाद्य सामग्री सस्ती होने की उम्मीद है।
🚢 बड़े निर्यात अभी भी बाहर
राहत मिलने के बावजूद, भारतीय निर्यातकों के लिए यह एक मिश्रित खबर है, क्योंकि दो प्रमुख निर्यात श्रेणियां—अरबों डॉलर के शिपमेंट वाली झींगा मछली और बासमती चावल—अभी भी उच्च शुल्क के दायरे में हैं।
कुल मिलाकर, अमेरिकी टैरिफ कटौती भारत के कृषि निर्यातकों के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जिससे एक प्रमुख व्यापारिक संबंध को स्थिर करने में मदद मिलेगी।
