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भारत के पहले स्वदेशी 32-बिट माइक्रोप्रोसेसर चिप ‘विक्रम’ का अनावरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने किया गया है। यह चिप भारत के आत्मनिर्भर भारत अभियान में एक महत्वपूर्ण कदम का प्रतिनिधित्व करता है और घरेलू प्रौद्योगिकी के विकास को बढ़ावा देता है।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने भारत के पहले स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित 32-बिट माइक्रोप्रोसेसर चिप ‘विक्रम’ का सफलतापूर्वक अनावरण किया गया है। यह उपलब्धि भारत के सेमीकंडक्टर मिशन और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह चिप मद्रास और मुंबई स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) के सहयोग से विकसित की गई है।
‘विक्रम’ चिप, जो पूरी तरह से भारत में डिजाइन और निर्मित की गई है, विभिन्न प्रकार के एम्बेडेड सिस्टम और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) उपकरणों के लिए एक शक्तिशाली समाधान प्रदान करती है। इसकी 32-बिट वास्तुकला इसे जटिल गणनाओं और डेटा प्रोसेसिंग कार्यों को कुशलता से संभालने में सक्षम बनाती है, जिससे यह विभिन्न औद्योगिक और उपभोक्ता अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त हो जाती है।
स्वदेशी नवाचार का प्रतीक
इस परियोजना का नेतृत्व करने वाले वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने प्रधानमंत्री को ‘विक्रम’ की क्षमताओं और इसके संभावित अनुप्रयोगों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह चिप न केवल भारत की तकनीकी क्षमता को बढ़ाएगी बल्कि विदेशी सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों पर देश की निर्भरता को भी कम करेगी। यह भारतीय स्टार्टअप्स और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माताओं के लिए नए अवसर खोलेगा, जिससे वे विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी उत्पाद विकसित कर सकेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस उपलब्धि पर टीम को बधाई दी और ‘विक्रम’ को भारत के वैज्ञानिक समुदाय की कड़ी मेहनत और नवाचार का प्रमाण बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की पहलें भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने भविष्य में ऐसे और स्वदेशी चिप्स के विकास को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।
भविष्य की संभावनाएं
‘विक्रम’ का विकास भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की एक बड़ी पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चिप रक्षा, संचार, ऑटोमोटिव और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में क्रांति ला सकती है।
यह उपलब्धि भारत के युवाओं को विज्ञान और इंजीनियरिंग में करियर बनाने के लिए भी प्रेरित करेगी, जिससे देश में एक मजबूत तकनीकी कार्यबल का निर्माण होगा। ‘विक्रम’ केवल एक चिप नहीं है; यह एक नए, तकनीकी रूप से उन्नत और आत्मनिर्भर भारत के सपने का प्रतीक है।
