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जल पर मंगल: नए अध्ययन में लगभग शुद्ध बर्फ से बने ग्लेशियर पाए गए

Source Matrabhumi

मंगल ग्रह पर जीवन की संभावनाओं को नई दिशा मिली

वॉशिंगटन: मंगल ग्रह पर जीवन की तलाश में जुटे वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। एक नए अध्ययन में मंगल ग्रह के भूमध्य रेखा के पास गहरे में दबे हुए बर्फ के ग्लेशियरों की खोज की गई है। इन ग्लेशियरों की खास बात यह है कि ये लगभग पूरी तरह से शुद्ध पानी की बर्फ से बने हैं। यह खोज मंगल पर पानी की मौजूदगी और भविष्य के मानव मिशनों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

अध्ययन की मुख्य बातें

हाल ही में नेचर जियोसाइंस (Nature Geoscience) नामक पत्रिका में प्रकाशित एक शोध पत्र में इन ग्लेशियरों का विस्तृत विवरण दिया गया है। शोधकर्ताओं ने मंगल ऑर्बिटर पर लगे रडार डेटा का उपयोग करके इन ग्लेशियरों का पता लगाया। अध्ययन के अनुसार, ये ग्लेशियर मंगल की सतह के नीचे लगभग 1.5 किलोमीटर की गहराई में मौजूद हैं और इनकी मोटाई भी काफी ज्यादा है।

इन ग्लेशियरों की संरचना ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है। पिछले अध्ययनों में मंगल पर पाई गई बर्फ में धूल और चट्टानों का मिश्रण पाया गया था, लेकिन इस नए अध्ययन में पाया गया है कि ये ग्लेशियर 90% से अधिक शुद्ध पानी की बर्फ से बने हैं। यह शुद्धता उन्हें भविष्य के मानव मिशनों के लिए एक आदर्श जल स्रोत बनाती है।

शोधकर्ताओं का दृष्टिकोण

अध्ययन के मुख्य लेखक, डॉ. जैक हॉल्टन (Dr. Jack Holton) ने कहा, “यह खोज अविश्वसनीय है। हमने पहले कभी मंगल पर इतनी शुद्ध और विशाल बर्फ की संरचना नहीं देखी थी। यह हमें मंगल के जल विज्ञान के बारे में बहुत कुछ बताता है और यह भविष्य के अंतरिक्ष यात्रियों के लिए एक गेम चेंजर हो सकता है।”

डॉ. हॉल्टन ने यह भी बताया कि ये ग्लेशियर संभवतः लाखों साल पहले मंगल पर हुई जलवायु परिवर्तन की अवधि के दौरान बने थे, जब मंगल का अक्षीय झुकाव अलग था और वहां अधिक बर्फबारी होती थी।

भविष्य के लिए संभावनाएं

यह खोज न केवल मंगल पर पानी की मौजूदगी को पुख्ता करती है, बल्कि यह भविष्य के मंगल मिशनों के लिए भी महत्वपूर्ण है। मंगल पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को अपने साथ भारी मात्रा में पानी ले जाने की आवश्यकता नहीं होगी। वे इन ग्लेशियरों से पानी निकाल सकते हैं, जिसे पीने के लिए और रॉकेट ईंधन (हाइड्रोजन और ऑक्सीजन) बनाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

नासा (NASA) और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियां इस खोज को लेकर उत्साहित हैं और वे भविष्य के रोवर और लैंडर मिशनों को इन क्षेत्रों में भेजने पर विचार कर सकते हैं ताकि इन ग्लेशियरों का और अधिक अध्ययन किया जा सके। यह खोज मंगल पर जीवन की संभावनाओं को भी नई दिशा देती है, क्योंकि जहां पानी है, वहां जीवन की भी संभावना हो सकती है।

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