Source Aljajeera
नई दिल्ली: पूर्व बांग्लादेश प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत में मौजूद होने की अटकलों के बीच यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या भारत उन्हें ढाका वापस भेजेगा, जहां उन्हें मौत की सजा का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन कूटनीतिक संकेत बताते हैं कि भारत ऐसा करने की बहुत कम संभावना है। इसके कई कानूनी, मानवीय और सामरिक कारण हैं।
1. भारत की नीति: मौत की सजा वाले मामलों में प्रत्यर्पण नहीं
भारत लंबे समय से ऐसे देशों को प्रत्यर्पण से इंकार करता आया है जहां आरोपी को मौत की सजा मिल सकती है।
भारत की कानूनी और संवैधानिक व्यवस्था स्पष्ट कहती है कि किसी भी व्यक्ति को तभी प्रत्यर्पित किया जा सकता है जब उस देश की सरकार लिखित में यह आश्वासन दे कि उसे मृत्युदंड नहीं दिया जाएगा।
2. हसीना का मामला राजनीतिक माना जाता है
बांग्लादेश में वर्तमान राजनीतिक उथल-पुथल के बीच हसीना के खिलाफ दर्ज मामलों को भारत पूरी तरह “राजनीतिक आरोप” की श्रेणी में देखता है।
भारत का मानना है कि राजनीतिक प्रतिशोध से जुड़े मामलों में प्रत्यर्पण अंतरराष्ट्रीय मानकों के खिलाफ है।
3. मानवीय आधार भारत का प्राथमिक कारण
यदि किसी व्यक्ति की जान को खतरा हो या उसके साथ अमानवीय व्यवहार की आशंका हो, तो भारतीय कानून और अंतरराष्ट्रीय संधियाँ उस व्यक्ति को वापस भेजने की अनुमति नहीं देतीं।
बांग्लादेश की मौजूदा अस्थिर स्थिति और हसीना के राजनीतिक विरोधियों की कठोर टिप्पणियाँ भारत को अधिक सतर्क बनाती हैं।
4. द्विपक्षीय संबंधों पर असर
भारत-बांग्लादेश संबंध दक्षिण एशिया की कूटनीति में बेहद अहम माने जाते हैं।
हसीना की पार्टी अवामी लीग भारत के साथ मजबूत रिश्तों की समर्थक रही है।
हसीना को मौत की सजा का सामना करने के लिए भेजना भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा को बदल सकता है, जिसकी भारत अनुमति नहीं देगा।
5. अंतरराष्ट्रीय छवि और मानवीय प्रतिबद्धताएँ
भारत खुद को “उत्तरदायी क्षेत्रीय शक्ति” के रूप में स्थापित कर चुका है। ऐसे में किसी पूर्व प्रधानमंत्री—खासकर पड़ोसी देश के—को मौत की सजा का सामना करने भेजना भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि पर सवाल खड़े कर सकता है।
निष्कर्ष
कानूनी, कूटनीतिक और मानवीय कारणों के चलते भारत के लिए शेख हसीना को बांग्लादेश वापस भेजना लगभग असंभव माना जा रहा है।
भारत संभवतः उन्हें सुरक्षित रहने की अनुमति देगा या किसी तीसरे देश जाने का विकल्प उपलब्ध करा सकता है।
